Article Socio-Political

Dr. Ambedkar and “Untouchability”: Redefining life through Buddhism

Swati Arora[1] Abstract: Dr. B.R Ambedkar was a twentieth century political and social reformer. Born as a Dalit, his works and efforts have impacted millions of people residing in India. He stood as the leader to ensure social justice and peace among the Dalit community. This article illustrates the relationship between casteism, and Ambedkar’s adoption […]

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बौद्ध और न्याय की दार्शनिक सहयात्रा

-अनुराधा मलाती भारतीय दार्शनिक चिंतन की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता उसकी खण्डन-मण्डन की परंपरा रही है। इसी खण्डन-मंडन के परिणामस्वरूप सूत्र, भाष्य, वार्तिक, टीका एवं प्रकरणादि ग्रन्थों के माध्यम से भारतीय परंपरा में व्याख्याओं, पुनर्व्याख्याओं से दर्शन की यात्रा, उसका विकास युक्तियुक्त रूप से अनवरत वर्द्धमान रही है। इसमें न्याय और बौद्ध विचारधारा के मध्य एक […]

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गौतम बुद्ध पारंपरिक या मौलिक ?

गौतम बुद्ध पारंपरिक नहीं, मौलिक हैं। गौतम बुद्ध किसी परंपरा, किसी लीक को नहीं पीटते हैं। वे ऐसा नहीं कहते हैं कि अतीत के ऋषियों ने ऐसा कहा था, इसलिए मान लो। वे ऐसा नहीं कहते हैं कि वेद में ऐसा लिखा है, इसलिए मान लो। वे ऐसा नहीं कहते हैं कि मैं कहता हूं इसलिए मान लो। वे कहते हैं, जब तक तुम न जान लो, मानना मत।