Can Emotional Indiscrimination hinder Effective Communication?– A First-Person Anecdote from Academia

We communicate through symbols which are generally commonly-agreed-upon abstract representations of real-world objects and phenomena. The correspondence is usually clear but there’s a significant degree of fuzziness involved owing to unavoidable subjectivity inherent in even the most standardised definitions as well as differential human perception and understanding of objects and phenomena. Language in its narrow sense is the most commonly used means of communication, and in its broadest sense is the very term used to refer to any and all means of communication. No word, phrase, or sentence is a perfect point – its meaning dissipates around it in a fuzzy cloud and the nuclei of these clouds are slightly or even considerably different for different individuals in different contexts of place and time.

विनय-पिटक में ’भिक्षुणी’ संघ की भूमिका

-दीेपिका कुमारी * प्रस्तावना: बौद्ध दर्शन के तीन महत्वपूर्ण अंग है- बुद्ध, धम्म और संघ। बुद्ध में महात्मा बुद्ध के स्वंय के विचार एंव उपदेश है, धम्म में बुद्ध की...

राजद्रोह कानून और अभिव्यक्ति की आजादी

सरकार की आलोचना और राज्यद्रोह
सबसे पहले यह समझने की दरकार है कि सरकार की आलोचना राजद्रोह नहीं है। मजबूत लोकतंत्र के लिए आलोचना अति आवश्यक है। सरकारी आती है जाती हैं जो कि राज्य बना रहता है। राज्य संविधान से चलता है परंतु देश एक भावना है। आता कई बार सरकार अगर गलत करें तो उसकी आलोचना करना उसका विरोध करना सच्चा राष्ट्रवाद है। साथ ही ये आलोचना हिंसक नहीं होनी चाहिए। लोकतंत्र में हिंसक और हिंसा भड़काने वाली व्यक्ति की कोई जगह नहीं है। स्वस्थ आलोचना की हमेशा तारीफ होनी चाहिए। भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने में श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जॉर्ज फर्नांडिस, अटल बिहारी वाजपेई चौधरी चरण सिंह जैसे नेताओं का अहम योगदान है जो सरकार की गलत नीतियों के कट्टर आलोचक थे।

कोरोना और टूट कर घर लौटी जिंदगी।

वह हजारों किलोमीटर पैदल चलकर घर जाने की कोशिश कौन भूल सकता है। कौन भूल सकता है उस मार्मिक दृश्य को, वह बेबसी वह हताशा वह सब खो जाने का डर चेहरे से साफ नजर आते थे। दूसरे कोरोना के लहर ने इस बेबसी की तस्वीर में और अधिक स्याह रंग भर दिया।

The Liberation in Sankhya Philosophy

Indian Philosophy has several doctrines and theories.  One of the six systems of Indian Philosophy is “Samkhya Darshan”. This darshan describes two independent realities-Prakriti and Purusa.  Prakriti is material reality and purusa is inactive,body-less but co-exists with prakriti. In Samkhya darshan not only explain prakriti and purusa theories but also explain liberation should be achieved in right knowledge of reality. In this samkhya darshan illuminate about liberation of self.